बगदाद: अरब की ऑनलाइन समाचार वेबसाइट राय अल-यौम ने दावा किया है कि अमेरिका और इस्राईल ने 12 अक्टूबर की रात इराक के आसमान में संयुक्त सैन्य अभ्यास किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभ्यास में एफ-16 और एफ-35 लड़ाकू विमानों के साथ हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी शामिल थे।
लेख में कहा गया है कि इराक की हवाई सीमा के इस कथित उल्लंघन पर देश के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। लेखक के मुताबिक, यह सैन्य अभ्यास इराक सरकार के उस घोषित रुख के खिलाफ है, जिसमें उसने कहा था कि वह क्षेत्रीय युद्धों और संघर्षों में किसी पक्ष का हिस्सा नहीं बनेगा। इराक ने यह भी कहा है कि वह अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल पड़ोसी देशों, खासकर ईरान, पर हमले के लिए नहीं होने देगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इसी दौरान इराक और सीरिया में अमेरिका के प्रतिनिधि टॉम बैरक ने इराकी अधिकारियों के साथ एक बैठक में कहा कि अमेरिका नीनवा प्रांत और उसके साथ संबंधों को मजबूत करने का समर्थन करता है। यह बैठक इराक में अमेरिकी राजदूत या प्रभारी राजनयिक की मौजूदगी में हुई।
लेख में इस बयान और संयुक्त सैन्य अभ्यास को साथ रखते हुए अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
राय अल-यौम के लेख में संयुक्त सैन्य अभ्यास के चार संभावित संदेश बताए गए हैं:
पहला: लेखक के अनुसार, यह अभ्यास दर्शाता है कि अमेरिका इराक की संप्रभुता और संघर्षों से दूर रहने की उसकी घोषित नीति का सम्मान नहीं कर रहा।
दूसरा: लेख में दावा किया गया है कि इराक के हवाई क्षेत्र पर वास्तविक नियंत्रण अमेरिका के पास है।
तीसरा: अतवान का कहना है कि इराक के साथ संबंध मजबूत करने की अमेरिकी घोषणाओं और उसके व्यवहार में विरोधाभास दिखाई देता है।
चौथा: अमेरिकी प्रशासन, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को इस बात की चिंता नहीं दिखी कि इस्राईल के साथ किए गए सैन्य अभ्यास से इराक के साथ द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं। लेखक इसे इस बात का संकेत मानता है कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच मौजूदा संबंधों के जारी रहने का भरोसा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक सरकार ने इस कथित कार्रवाई के खिलाफ कोई औपचारिक विरोध दर्ज नहीं कराया। लेख में इस बात को भी महत्वपूर्ण बताया गया है कि सैन्य अभ्यास में ऐसे देश की भागीदारी का दावा किया गया है, जिसके साथ इराक के संबंधों में दुश्मनी और संघर्ष का पहलू मौजूद बताया जाता है।
अंत में राय अल-यौम ने कहा कि भले ही अमेरिका का इराक के तेल राजस्व और उससे जुड़े वित्तीय मामलों पर प्रभाव हो, लेकिन इससे इराक की हवाई संप्रभुता के कथित उल्लंघन पर सरकार की चुप्पी को सही नहीं ठहराया जा सकता।
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